2024 की तैयारी में खरगे, कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में नेताओं से मांगी रिपोर्ट, नए लोगों को मौका देने की कही बात

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कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी की बैठक- India TV Hindi
Image Source : ANI कांग्रेस स्टीयरिंग कमेटी की बैठक

कांग्रेस नए अध्यक्ष के नेतृत्व में काफी एक्टिव नजर आ रही है। गुजरात विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी पर हमलावर दिखे खरगे ने आज हुई कांग्रेस कमेटी की बैठक में कांग्रेस के नेताओं से कई सवाल पूछे। बैठक में सोनिया गांधी, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता शामिल हुए। खरगे ने पदाधिकारियों से पूछा कि आपके प्रदेश में जिसके आप प्रभारी है, अगले 30 दिन से 90 दिन के बीच संगठन व जनहित के मुद्दों पर आंदोलन के लिए क्या रूपरेखा है? जिन प्रांतों में आज से साल 2024 के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं वहां चुनाव तक क्या प्लानिंग है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सख्त लहजे में कहा कुछ साथियों ने मान लिया है कि जिम्मेदारी निभाने में कमी को नजरंदाज कर दिया जाएगा, लेकिन यह ने तो ठीक है और ना ही मंजूर किया जा सकता है। जो लोग जिम्मेदारी निभाने में असक्षम हैं, उन्हें नए साथियों को मौका देना होगा। 

आंदोलन का एक खाका तैयार करें: खरगे

खरगे ने कहा,  ”मैं उम्मीद करता हूँ कि आप सब संगठन व आंदोलन का एक खाका तैयार कर अगले 15 से 30 दिन में इस पर मिल बैठकर मुझसे चर्चा करेंगे। कांग्रेस स्टीयरिंग कमिटी के सदस्यों व पार्टी के अन्य नेताओं को भी जरूरत के अनुसार आप इस कार्यक्रम में शामिल करेंगे।” उन्होंने कहा, ”भारत जोड़ो यात्रा अब एक राष्ट्र आंदोलन का रूप ले चुकी है। एक ऐसा आंदोलन, जो देश में कमरतोड़ महंगाई, भयंकर बेरोजगारी, नाकाबिले बर्दाश्त आर्थिक व सामाजिक असमानता, तथा नफरत की राजनीति के खिलाफ एक निर्णायक जंग का आह्वान है।”

यात्रा के उसूलों को हर घर तक पहुंचाना है।”

उन्होंने कहा, ”देश के करोड़ों लोग राहुल गांधी जी व कांग्रेस के संकल्प से जुड़े हैं। इनमें भारी संख्या में वो लोग भी हैं, जो कांग्रेस से नहीं जुड़े थे, या फिर हमारी आलोचना किया करते थे। भारत जोड़ो यात्रा एक राष्ट्रीय जन आंदोलन का रूप ले लेना ही इस यात्रा की सबसे बड़ी कामयाबी है। पर मैं आपके समक्ष यह भी रखना चाहूंगा कि इस राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन को देश के हर गांव, हर शहर, हर व्यक्ति तक पहुंचाने में हम सबकी क्या भूमिका रही है? जहां कई प्रदेशों ने भारत जोड़ो यात्रा निकाली है, क्या हम इसके बुनियादी उसूलों को हर गांव तक, हर शहर और कस्बे तक ले जा पाए हैं? मुझे लगता है कि हम जो कर पाए, वह एक सार्थक कोशिश तो है, पर नाकाफ़ी है। हम सबको इन मुद्दों को, यात्रा की भावना को, यात्रा के उसूलों को हर घर तक पहुचाना है।”

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