काशी तमिल संगमम् एक ऐसी सोच जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को बल देती है : अनुराग ठाकुर

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Anurag Thakur- India TV Hindi
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केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने रविवार को कहा कि काशी तमिल संगमम् एक ऐसी सोच है जो ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को बल देती है। काशी तमिल संगमम के तहत आयोजित खेल महोत्सव के चौथे दिन बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में आयोजित क्रिकेट मैच में अपने संबोधन में बतौर मुख्य अतिथि अनुराग ठाकुर ने यह बात कही। 

काशी तमिल संगमम् के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया

अनुराग ठाकुर ने कहा कि वाराणसी में काशी तमिल संगमम् में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध को पुनर्जीवित किया है। उन्होंने काशी तमिल संगमम् पहल के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया। रविवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार उन्होंने कहा कि कला, संस्कृति और साहित्य सभी क्षेत्रों में काशी और तमिल का जो मेल है वह हजारों वर्ष पुराना है और उसको फिर एक बार जीवंत किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर तमिलनाडु के अलग-अलग कोनों से 2500 लोग उत्तर प्रदेश में आ रहे हैं तथा खेलों के आयोजन से युवाओं में एक उत्साह भरा है। उनका कहना था कि एक महीने तक चलने वाले काशी तमिल संगमम् में आठ दिन खेलों के लिए दिए गए हैं, यह अपने आप में दिखाता है कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के लिए खेल कितना महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार इस आयोजन से एक नया जुड़ाव देखने को मिल रहा है। 

यूपी की टीम ने 55 रन से जीत हासिल की 

बयान के अनुसार काशी तमिल संगमम् के तहत आयोजित खेल महोत्सव में चौथे दिन क्रिकेट मैच का आयोजन बीएचयू में हुआ। मैच की शुरुआत उत्तर प्रदेश की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। शानदार बल्लेबाजी करते हुए इस टीम ने 20 ओवर में सात विकेट के नुकसान पर 198 रन बनाया। उत्तर प्रदेश की टीम के हर्ष त्यागी ने सर्वाधिक 82 रन बनाए। इस टीम ने तमिलनाडु की टीम को जीत के लिए 199 रन का लक्ष्य दिया। जवाब में तमिलनाडु की टीम तीन विकेट के नुकसान पर 144 रन ही बना पाई। इस रोमांचक मैच में यूपी की टीम ने 55 रन से जीत हासिल किया।

खेल मंत्री ने कहा कि मैच हारना या जीतना मायने नहीं रखता, इस दोस्ताना मैच से एक दूसरे को जानने में मदद मिलेगी। उनका कहना था कि यहां तक कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की भाषा नहीं जानता है, तो भी वह संवाद कर सकता है और वे एक-दूसरे को जान सकते हैं। ठाकुर ने अमृत काल के दौरान प्रधानमंत्री के विजन पर प्रकाश डाला कि हमें केवल अधिकारों की इच्छा नहीं करनी चाहिए, बल्कि जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में वाराणसी में जिस स्तर का विकास कार्य हुए हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ था।

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