Umaria News : सर्द रातों में सुस्त गश्त, सुरक्षित नहीं बांधवगढ़ में बाघ

उमरिया

संजय कुमार शर्मा. उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में रातें सर्द होते ही गश्त धीमी पड़ गई हैं जिसकी वजह से जंगल के अंदर होने वाली घटनाओं की जानकारी तुरंत विभाग के अधिकारियों तक नहीं पहुंच पा रही है। पिछले महीने के आखिर में हुई दो बड़ी घटनाएं इस बात का प्रमाण है। दोनों ही घटनाओं में दूसरे-तीसरे दिन वन विभाग के अधिकारियों को घटना की जानकारी लगी जिससे बीमार, भूखे घायल तेंदुए के शावकों को नहीं बचाया जा सका।

रात की गश्त बंदः

पतौर, पनपथा कोर क्षेत्र से लगे गांव के लोगों को आरोप है कि इस दिशा में रात की गश्त नहीं हो रही है जिसकी वजह से उनकी फसलों को जंगली जानवर खासतौर जंगली हाथी खराब कर जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी पदों पर आसीन अधिकारी और कर्मचारी तो रात में गश्त के लिए निकलते ही नहीं हैं। इस बारे में विजय तिवारी ने बताया कि पनपथा कोर में तो हाल बेहद खराब हैं। पिछले महीने 21 से 28 तारीख के बीच महज आठ दिनों के अंदर इसी क्षेत्र में तीन तेंदुओं की मौत हो गई थी। इसकी वजह यही है कि यहां गश्त नहीं हो रही है जिससे जानवरों के बीच होने वाले द्वंद को रोकने का प्रयास भी नहीं हो पाता है।

सुरक्षा श्रमिकों की संख्या कमः

बांधवगढ़ में जंगल की सुरक्षा करने वाले सुरक्षा श्रमिकों की संख्या भी बेहद कम है। बताया गया है कि कागज और फील्ड में सुरक्षा श्रमिकों की संख्या का आंकड़ा अलग है। कागज में संख्या ज्यादा दिखाई जाती है और फील्ड में कम लोग रखे जाते हैं। दरअसल यह खेल रेंज स्तर पर किया जाता है। सुरक्षा श्रमिकों की संख्या कम होने की वजह से पूरे जंगल में गश्त नहीं हो पाती। यही कारण है कि बीमार और घायल जानवरों का पता कई कई दिनों बाद चल पाता है।

शिकार का खतरा बढ़ाः

बांधवगढ़ गश्त सुस्त होने के कारण शिकार का खतरा बढ़ने की आशंका लगातार बनी रहती है। हालांकि बाघों की मौत के बाद अक्सर वन प्रबंधन यही बताता है कि उनकी मौत आपसी संघर्ष में हुई है। इस तरह की कोई घटना स्थल को पूरी तरह से मीडिया से बचाकर रखा जाता है और मृत जानवर के अंतिम संस्कार के एक-दो फोटो जारी करके मामले को निपटा दिया जाता है। हाल ही में दो तेंदुए के शावको और एक घायल तेंदुए की जानकारी कई दिन बाद पार्क व प्रबंधन को लगी, जिससे उन्हें बचाया नहीं जा सका।

ठंड में जरूरी है गश्तः

ठंड के दिनों में जंगल के अंदर सुरक्षा की ज्यादा आवश्यकता होती है, क्योंकि इन्हीं दिनों में शिकारी सक्रिय होते हैं। जबकि बांधवगढ़ में गश्त के हालात बहुत सुस्त हैं, परिणामस्वरूप बाघ यहां सुरक्षित नहीं है। बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान में ठंड के दौरान बाघों को शिकारियों से बचाने के लिए कड़ी सुरक्षा के लिए अलर्ट घोषित किया जाता है पर यह अलर्ट सिर्फ कागजी ही होता है। जानकारों के अनुसार ठंड के दिनों मे मौसम का फायदा उठा कर शिकारी पार्क में घुस कर शिकार करने का प्रयत्न करते हैं। ये शिकारी पार्क के चारों तरफ विभिन्ना गांवों में रहने वाले लोग और यहां पर डेरा डालने वाले बहेलियों और पन्नाा, छतरपुर की तरफ से आने वाले बहेलियों और पारधी और कैम्प डाल कर यहां निवास करते है।

यह किया जाता है दावाः

हालांकि पार्क प्रबंधन दावा करता है कि जंगल और जानवरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाती है। इसके लिए सभी उप वनमंडलाधिकारी और 9 वन परिक्षेत्राधिकारी को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के वनप्राणी की सुरक्षा के लिए 95 पेट्रोलिंग कैम्प में 200 गार्ड 24 घंटे सुरक्षा के जिए तैनात किए गए हैं। साथ ही अतिरिक्त बफर जोन मे 300 श्रमिक गश्ती के लिए तैनात किए गए है। बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व 9 रेंज में 70 -70 कर्मचारियों को गश्त कर निगरानी के लिए लगाया गया है। सुरक्षा को और भी पुख्ता बनाने के लिए पार्क के वयस्क हथियों को मैदान में सक्रिय रह कर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि ऐसा कुछ होता हुआ दिखाई नहीं पड़ता।

Posted By: Nai Dunia News Network