अब पारंपरिक विधि से हो सकेगा कोरोना मरीजों का अंतिम संस्कार

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नई दिल्ली: अंतिम संस्कार का यह नया तरीका है दिल्ली समेत देशभर में कोरोना वायरस से संक्रमित शवों के संस्कार के लिए पहले केवल सीएनजी क्रिमेटोरियम की व्यवस्था थी लेकिन अब लकड़ियों वाली पद्धति से अंतिम संस्कार की इजाजत दे दी गई है.

लकड़ियों वाली पारंपरिक विधि से अंतिम संस्कार तो शुरू हो गया लेकिन इसी दौरान हाईकोर्ट में एक याचिका इस बात की भी लगाई गई कि यह संस्कार ग्रीन क्रिमेटोरियम से हो जहां पारंपरिक विधि में एक शव को जलाने में 400 किलो लकड़ी का इस्तेमाल होता है वहीं इस मोक्षदा सिस्टम में केवल डेढ़ सौ किलो लकड़ी लगती है और वक्त भी कम लगता है.

2000 बिस्तरों वाले देश के सबसे बड़े कोरोनावायरस अस्पताल लोकनायक अस्पताल में जब शवों का जमावड़ा लग गया तब दिल्ली हाईकोर्ट को स्वत संज्ञान लेना पड़ा. दिल्ली सरकार ने अब लकड़ियों वाली पारंपरिक विधि से संस्कार की इजाजत दे दी है. मामले की सुनवाई 2 जून को फिर से होगी.

कोरोना वायरस से लड़ा जा सकता है, जंग जीती जा सकती हम यह रिपोर्ट आपको सावधान करने के लिए ही लेकर आए हैं, lockdown 5 के दौर में आपको सतर्क रहना है.

पत्नी के शव के लिए लाइन में खड़े संजय अरोड़ा कहते हैं, दिल्ली के बड़े प्राइवेट अस्पताल गंगाराम अस्पताल में कोरोना के इलाज का 1 दिन का बिल 1 लाख 20 हजार का था. अपनी पत्नी को बचाने के लिए वो भी भरा. लेकिन आज उसी पत्नी के शव के लिए कतार में लगे हुए हैं.

शवों की शिनाख्त इतनी मुश्किल हो गई है कि जमीला बानो को आखिरी सफर के लिए लेने आए इस परिवार को एक हिंदू महिला का शव थमा दिया गया था. दुनिया हिंदू मुसलमान में उलझी रहे, मौत का कोई धर्म कहां होता है वो तो आखिरी सत्य है.

देश के सबसे बड़े कोरोना अस्पताल की मोर्चरी के बाहर रूह कंपा देने वाली ऐसी कई कहानियां हैं. तीन दिन से अपनी मां के शव का इंतजार कर रही बेटी भी कतार में है. तनु के पिता को अपनी पत्नी का इंतजार भी है और उसकी आखिरी निशानियों की तमन्ना भी.

मौत के बाद भी कुछ बाकी बचता है क्या. लेकिन कोरोना काल ने ये सच भी बदल दिया. मौत के बाद कतार लग रही है. शवों को हासिल करने का इंतजार बचा है, हर कोई अपनी बारी के लिए खड़ा है. एक बेजान को आखिरी सफर पर ले जाने के निर्मम इंतजार की लाइन लंबी होती जा रही है.

एलएनजेपी की मोर्चरी में शवों का अंबार लग चुका है. एक के ऊपर एक बेजान शरीर रखे जा रहे हैं. क्रिमेशन का प्रोटोकोल है कि सीएनजी मशीन से ही किया जाए. मशीनें कम पड़ रही हैं और यहां डॉक्टरों की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं.

पीपीई किट पहनकर ये रिपोर्टिंग करना आसान नहीं लेकिन आपको सावधान करना जरूरी है. अब अदालत ने दखल दिया है. दिल्ली सरकार ने नाजुक होती हालात देखते हुए शवों को पारंपरिक लकड़ी से संस्कार की इजाजत दे दी है. इससे आखिरी सफर थोड़ा आसान तो हुआ है लेकिन परिवार के दर्द का समाधान शायद ही निकले. 

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