एमएसएमई की नई परिभाषा लघु उद्योग को न सिर्फ नया स्वरूप देगा बल्कि नई पहचान भी देगा

अन्य

नई दिल्ली
सरकार द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग () की परिभाषा बदलने के फैसले को लघु उद्यमियों ने न सिर्फ इस क्षेत्र के लिए बल्कि संपूर्ण अर्थव्यवस्था के लिए एक अप्रतिम सौगात कहा है। इस क्षेत्र का कहना है कि क्षेत्र लॉकडाउन से पहले से ही काफी समस्याओं से जूझ रहा था। ऐसे में लॉकडाउन के दो-तीन महीनों ने तो एक तरह से कमर ही तोड़ दी। अब सरकार ने इस क्षेत्र की सुध ली है। उम्मीद है कि अगले 3-4 तिमाही में इसका असर दिखने लगेगा। इस क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियां जोर पकड़ेंगी
एमएमएमई क्षेत्र के उद्यमियों का प्रतिनिधित्व करने वाला उद्योग संगठन पीएचडी चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री () के अध्यक्ष डी. के. अग्रवाल का कहना है कि मध्यम दर्जे के उद्योग पहले से ही बेहतर काम कर रहे हैं। इस क्षेत्र के लिए जो पहले परिभाषा तय की गई थी, उसमें 10 करोड़ रुपये का निवेश और 5 करोड़ रुपये का टर्नओवर था, जो कि काफी कम था। इसे बढ़ा कर 20 करोड़ रुपये का निवेश और 100 करोड़ रुपये का टर्नओवर का फार्मूला तय किया गया था। यह भी कम था और पीएचडीसीसीआई ने इसकी सीमा बढ़ाने के लिए आवाज भी उठायी थी। अच्छी बात है कि अब इस श्रेणी के उद्योग में 50 करोड़ रुपये का निवेश और 250 करोड़ रुपये के कारोबार को मान्यता दी गई है। इससे इस क्षेत्र में विनिर्माण की गतिविधियां खूब जोर पकड़ेंगी। जीडीपी में भी होगी बढ़ोतरी
डी. के. अग्रवाल का कहना है कि इस समय बिना परिभाषा में विस्तार किये हुए ही देश के सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान 29 फीसदी का है। जबकि मध्यम दर्जे के उद्यमों के लिए 250 करोड़ रुपये के कारोबार और 50 करोड़ रुपये प्लांट एवं मशीनरी में निवेश का दरवाजा खुलेगा तो इस क्षेत्र में उत्पादन कई गुना बढ़ जाएगा। इसका असर रोजगार पर और अंतत: जीडीपी में बढ़ोतरी पर पड़ेगा। एमएसएमई के लिए साहसिक आर्थिक सुधारों के लिए एक ऐतिहासिक दिन
फेडरेशन आफ इंडियन माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज () के सेक्रेटरी जनरल अनिल भारद्वाज का कहना है कि आज का दिन MSME के लिए साहसिक आर्थिक सुधारों का एक ऐतिहासिक दिन माना जाएगा। उनका कहना है कि कुछ ऐसे उद्योग हैं, जिसमें प्लांट एंड मेशिनरी तो काफी कम का होता है लेकिन उसके कच्चे माल काफी कीमती होते हैं। इनमें जेम्स एंड ज्वैलरी उद्योग आते हैं। इसका कच्चा माल काफी महंगा होता है लेकिन इसका निर्यात में भी भारी योगदान है। मंझोले उद्योग की परिभाषा में सुधार करने से अब इस क्षेत्र जैसे उद्योगों को काफी फायदा होगा। 3-4 तिमाही में दिखेगा असर
भारद्वाज का कहना है कि आज जो फैसला हुआ है, इसका असर दिखने में तीन से चार तिमाही का वक्त लगेगा। उनका कहना है कि लॉकडाउन से पहले भी करीब 5 लाख स्ट्रेस्ड थे। लॉकडाउन में उनकी संख्या और बढ़ेगी। लेकिन अब सरकार ने इनकी सुध लेगी तो उम्मीद की जा रही है कि धीरे-धीरे हालात बदलेंगे।

Source