मू​डीज के रिव्यू के बाद चीन से भारत आने वाली कंपनियों का बदलेगा मूड?

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नई दिल्ली
मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ( Investors Service) की तरफ से की रेटिंग (India’s ) को घटाकर कर देने से छोड़ कर भारत को ठिकाना बनाने वाली बहराष्ट्रीय कंपनियों का मूड भी बदल सकता है। दरअसल, मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में कुछ ऐसा जिक्र किया है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाली कंपनियों का भारत में काम करने संबंधी निर्णय प्रभावित हो सकता है। सिर्फ डाउनग्रेड ही नहीं किया
मैनेजमेंट गुरू और वित्तीय एवं समग्र विकास के विशेषज्ञ अर्थशास्त्री डा. विकास सिंह का कहना है कि मूडीज ने भारत की जो सोवरन रेटिंग को डाउनग्रेड किया है, इसमें सिर्फ डाउनग्रेड का काम ही नहीं है। इस रिपोर्ट में भारत के बारे में कुछ ऐसी बातें लिख दी हैं, जिससे यहां एफडीआई प्रवाह में रूकावट आएगी। उन्होंने रिपोर्ट में long lasting, reform less, more entrenched slowdown, Slow reform momentum and constrained policy effectiveness hamstrung by tardy implementation of reforms जैसे शब्दों का उपयोग किया है। यही वजह है कि अब विदेशी निवेशक और कंपनियां यहां आने से पहले सोचेंगी। चीन से आने वाली कंपनियां बदल सकती हैं अपना मन
डा. सिंह का कहना है कि कोरोना संकट के बीच कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन का मैन्यूफैक्चरिंग हब हटा कर भारत लाने को सोच रही थी। लेकिन अब मूडीज की रिपोर्ट से उनका मन बदल सकता है। जब वे जानेंगे कि भारत में तो रिफार्म हो ही नहीं रहा तो उन्हें लगेगा कि भारत गए तो वह फंस सकते हैं। आउटलुक स्थिर से निगेटिव हो गया है
मूडीज ने कल ही भारत के आउटलुक को ‘स्थिर’ से बदलकर ‘निगेटिव’ कर दिया है। मूडीज ने भारत के लोकल-करंसी-सीनियर अनसिक्योर्ड रेटिंग को BAA2 से घटाकर BAA3 कर दिया है। साथ ही छोटी अवधि वाली लोकल-करंसी रेटिंग को भी P-2 से घटाकर P-3 कर दिया है। इससे पहले S&P और फिच रेटिंग्स () ने भी भारत की रेटिंग को घटाया है।

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