छोटी दूरी के लिए कार/मोटरसाइकिल के बजाय साइकिल चलायेंगे तो बचेंगे हर साल 1.8 ट्रिलियन रुपये

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नई दिल्ली भारत में भले ही अब एक पखवाड़े में नए कोरोना () पाजिटिव संक्रमित लोगों की संख्या एक लाख हो गई हो, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian economy) अब धीरे धीरे अनलॉक की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक परिवहन के परंपरागत साधनों से हटकर परिवहन के अन्य साधनों की ओर रूख कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग परिवहन (Transport) के सुरक्षित विकल्प अपनाना चाहते हैं। दुनिया भर में शहर इस बदलती ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए सड़कों को () चालकों के लिए अनुकूल बना रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या साइकिल भारत के लिए परिवहन का नया प्रभावी समाधान हो सकती है? एक अध्ययन से इस बात का खुलासा हुआ है कि अगर छोटी दूरी की यात्रा के लिए दोपहिया या चार-पहिया वाहनों के बजाए साइकिल को अपनाया जाए तो इससे हर साल 1.8 ट्रिलियन रुपये की होगी। डब्ल्यूएचओ ने की है वकालत
विश्व स्वास्थ्य संगठन (), सामाजिक दूरी को सुनिश्चित करने तथा शारीरिक व्यायाम (Physical fitness) को बढ़ावा देने के लिए साइकिल का इस्तेमाल बढ़ाने की सलाह दे रहा है। लाॅकडाउन के दौरान पर्यावरण में हुए सुधार के बाद ‘हरित सुधार’ की दिशा में एक नए वैश्विक आंदोलन की शुरूआत हुई है। स्वास्थ्य कर्मियों के 200 से अधिक संगठनों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र, जिसे जी20 लीडर्स को भेजा गया है, कोरोनावायरस संकट से ‘हरित सुधार’ की अपील करता है। मिलान, जेनेवा, ब्रुसेल्स और लंदन जैसे शहरों ने अपनी सड़कों को साइकिलों के अनुकूल बनाने के लिए भारी निवेश का फैसला लिया है, ताकि बड़ी संख्या में लोग अपनी साइकिलों से काम पर जा सकें। भारत में शुरू किया गया है अभियान
विश्व साइकिल दिवस () के मौके पर हीरो समूह ने एक अभियान की शुरूआत की है, जिसके ज़रिए केन्द्र एवं राज्य सरकारों से अपील की गई है कि शहरी सड़कों को साइकिलों के लिए अनुकूल बनाया जाए और इस दृष्टि से लोगों के व्यवहार में बदलाव लाए जाएं। ‘रोड पे दिखेंगी तभी तो चलेंगी’ अभियान नागरिकों से भी आग्रह करता है कि अपने साइकिल चलाने के अधिकार को समझें, सुरक्षित सड़कों की मांग करें, शहरी अधिकारियों से साइकिल चलाने के लिए सुरक्षित स्पेस की मांग करें। शहरी ढांचागत संरचना को साइकिल के अनुरूप बनाया जाए
हीरो मोटर्स कंपनी (HMC) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक पंकज मुंजाल का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था ऐसे समय में दोबारा शुरू हुई है, जब बीमारी का ग्राफ तेज़ी से बढ़ रहा है। ऐसे में सड़क सहित हर स्थान पर सोशल डिस्टेंसिंग (social distencing) के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। आम जनता सार्वजनिक परिवहन के विभिन्न साधनों का इस्तेमाल करती है, ऐसे में शहरी संरचना को साइकिलों के लिए अनुकूल बनाने की आवश्यकता है। अगर दुनिया भर के शहरों पर नज़र डालें तो शहर अपनी सड़कों में बड़े बदलाव ला रहे हैं। सार्वजनिक परिवहन के साधनों में भीड़भाड़ को कम करने के लिए सड़कों को साइकिलों के अनुकूल बना रहे हैं। भारत को भी इन वैश्विक रूझानों का संज्ञान लेना होगा और इस स्थिति को अवसर के रूप में देखना होगा तथा पर्यावरण के अनुकूल साइकिलों की ओर रूख करना होगा। छोटी दूरी की यात्रा साइकिल से करेंगे तो हर साल बचेंगे 1.8 ट्रिलियन रुपये
यूएन एनवायरनमेन्ट प्रोग्राम के अनुसार पैदल चलने और साइकिल चलाने के लिए निवेश कर जिंदगियां बचाई जा सकती हैं, पर्यावरण को सुरक्षित किया जा सकता है। साथ ही गरीबी उन्मूलन में भी मदद मिल सकती है। द एनर्जी एण्ड रिसोर्स इन्स्टीट्यूट () द्वारा जनवरी 2019 में किए गए एक अध्ययन के अनुसार अगर छोटी दूरी की यात्रा के लिए दोपहिया या चार-पहिया वाहनों के बजाए साइकिल को अपनाया जाए तो इससे हर साल 1.8 ट्रिलियन रुपये की बचत होगी।

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